
RGPV ग्रेडिंग सिस्टम 2026 (RGPV Grading System 2026 in Hindi): मध्य प्रदेश विधानसभा अधिनियम 13, 1998 के तहत स्थापित राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (RGPV) एक टेक्निकल यूनिवर्सिटी है। यह UGC मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी है और NAAC द्वारा A+ रेटिंग मिली हुई है। RGPV छात्रों के मार्क्स का इवैल्यूएशन उनकी एग्जाम में प्राप्त परसेंटेज के आधार पर करता है। उदाहरण के लिए, 91-100% मार्क्स प्राप्त करने वाले छात्र को 10 ग्रेड पॉइंट मिलते हैं जो A+ ग्रेड के बराबर होता है। थ्योरी और प्रैक्टिकल दोनों एग्जाम के इवैल्यूएशन के लिए ग्रेडिंग स्केल एक समान रहता है। RGPV ग्रेडिंग सिस्टम 2026 (RGPV Grading System 2026) के बारे में पूरी जानकारी इस लेख में दी गई है।
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RGPV में क्रेडिट-बेस्ड ग्रेडिंग सिस्टम मार्क्स डिस्ट्रीब्यूशन (Credit-Based Grading System Marks Distribution at RGVP in Hindi)
RGPV ग्रेडिंग सिस्टम (RGPV Grading System) में किसी भी प्रोग्राम में शामिल प्रत्येक छात्र को उसके शिक्षक या उस विषय के फैकल्टी मेंबर से एक ग्रेड मिलेगा। छात्रों के ग्रेड उनके एग्जाम, होमवर्क, क्विज, लैब, इंटर्नशिप, क्लासवर्क, मिडटर्म में कितना अच्छा प्रदर्शन करते हैं उस पर डिपेंड करता है। छात्र RGPV क्रेडिट-बेस्ड सिस्टम देख सकते हैं।
ग्रेड | परसेंटेज मार्क्स रेंज | ग्रेड पॉइंट्स | डिस्क्रिप्शन ऑफ़ परफॉरमेंस |
|---|---|---|---|
A+ | 91-100 | 10 | आउटस्टैंडिंग |
A | 81-90 | 9 | एक्सीलेंट |
B+ | 71-80 | 8 | वैरी गुड |
B | 61-70 | 7 | गुड |
C | 51-60 | 6 | एवरेज |
C+ | 41-50 | 5 | सटिस्फैक्टरी |
D | 31-40 | 4 | मार्जिनल |
F | 30 और उससे कम | 0 | फेल |
I | 0 | इन्कम्प्लीट | |
W | 0 | विथड्रॉल |
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RGPV अवार्ड्स ऑफ़ क्रेडिट्स एंड ग्रेड्स (RGPV Awards of Credits and Grades in Hindi)
छात्रों की परफॉरमेंस का इवैल्यूएशन विभिन्न माध्यमों जैसे ट्यूटोरियल, प्रैक्टिकल, असाइनमेंट, टेस्ट, फील्डवर्क, सेमिनार, इंटर्नशिप, क्विज़ और एग्जाम के माध्यम से किया जाएगा। ये असेसमेंट मेथड्स रिलेटेड स्टडीज बोर्ड द्वारा निर्धारित की जाती हैं और यूनिवर्सिटी की ऐकडेमिक कॉउन्सिल और एग्जीक्यूटिव कॉउन्सिल द्वारा कन्फर्म की जाती हैं।
लिखित (थ्योरी)
थ्योरी पार्ट के लिए उम्मीदवारों का इवैल्यूएशन इस प्रकार किया जाता है:
डिटेल्स | वेटेज |
|---|---|
क्विज़, असाइनमेंट और रेगुलरिटी | 10% |
मिड- सेमेस्टर टेस्ट | 20% |
एन्ड- सेमेस्टर एग्जाम | 70% |
टोटल | 100% |
प्रैक्टिकल
प्रैक्टिकल पार्ट के लिए उम्मीदवारों का इवैल्यूएशन इस प्रकार किया जाता है:
डिटेल्स | वेटेज |
|---|---|
लैब वर्क एंड परफॉरमेंस, क्विज़, असाइनमेंट और रेगुलरिटी | 40% |
एन्ड – सेमेस्टर टेस्ट | 60% |
टोटल | 100% |
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RGPV ग्रेड शीट कैसे कैलकुलेट की जाती है? (How is the RGPV Grade Sheet Calculated in Hindi?)
RGPV ग्रेड शीट के आधार पर ही छात्रों का परफॉर्मन्स इवैल्युएट किया जाता है। RGPV ग्रेड शीट कैलकुलेट करने के आधार नीचे देख सकते हैं।
मार्क्स और ग्रेडिंग स्केल: पूरे सेमेस्टर के दौरान आपको थ्योरी एग्जाम, प्रैक्टिकल एग्जाम, असाइनमेंट और क्विज़ जैसे अलग-अलग कॉम्पोनेन्ट से मार्क्स प्राप्त होते हैं। RGPV 10-पॉइंट ग्रेडिंग स्केल का पालन करता है जहाँ प्रत्येक ग्रेड एक स्पेसिफिक लैटर ग्रेड से मेल खाता है।
क्रेडिट और ग्रेड पॉइंट: हर कोर्स में क्रेडिट की एक निश्चित संख्या होती है जो आपके टाइम टेबल में उसके महत्व को दर्शाती है। कोर्स में आपके लैटर ग्रेड का मिलान 1 से 10 के पैमाने पर एक ग्रेड पॉइंट से किया जाता है।
वेटेड ग्रेड पॉइंट कैलकुलेशन: कोर्सेस के अलग-अलग क्रेडिट वेट होने की वजह से प्रत्येक कोर्स में आपके परफॉरमेंस का वेट उसी के अनुसार होगा। वेटेड ग्रेड पॉइंट कैलकुलेट करने के लिए कोर्स में प्राप्त ग्रेड पॉइंट को उसके क्रेडिट नंबर से मल्टीप्लाई करें।
सेमेस्टर ग्रेड पॉइंट एवरेज (SGPA): आपका SGPA किसी स्पेसिफिक सेमेस्टर में आपकी परफॉरमेंस को दर्शाता है। SGPA कैलकुलेट करने के लिए उस सेमेस्टर के सभी कोर्सेस के वेटेड ग्रेड पॉइंट्स को जोड़ें और टोटल नंबर को क्रेडिट नंबर से डिवाइड करें।
क्युमुलेटिव ग्रेड पॉइंट एवरेज (CGPA): आपका CGPA सभी सेमेस्टर में आपके पुरे ऐकडेमिक परफॉरमेंस को दिखता है। इसे प्राप्त करने के लिए सभी सेमेस्टर के वेटेड ग्रेड पॉइंट्स को जोड़ें और उन्हें अपने पूरे टाइम टेबल में लिए गए टोटल क्रेडिट से डिवाइड करें।
उदाहरण
मान लीजिए कि आप एक सेमेस्टर में तीन विषय लेते हैं:
विषय A: 4 क्रेडिट, ग्रेड पॉइंट = 8
विषय B: 3 क्रेडिट, ग्रेड पॉइंट = 7
विषय C: 5 क्रेडिट, ग्रेड पॉइंट = 9
वेटेड ग्रेड पॉइंट्स कैलकुलेशन:
विषय A: 8 (ग्रेड पॉइंट) * 4 (क्रेडिट) = 32
विषय बी: 7 (ग्रेड प्वाइंट) * 3 (क्रेडिट) = 21
विषय C: 9 (ग्रेड पॉइंट) * 5 (क्रेडिट) = 45
टोटल वेटेड ग्रेड पॉइंट्स= 32 + 21 + 45 = 98
टोटल क्रेडिट = 4 + 3 + 5 = 12
सेमेस्टर के लिए SGPA = टोटल वेटेड ग्रेड पॉइंट्स (98) / टोटल क्रेडिट (12) = 8.17
मान लीजिए कि पिछले सेमेस्टर का SGPA 7.91 है।
साल के लिए CGPA = (7.91 + 8.17) / 2 = 8.04.
कुल मिलाकर, जब आप समझ जाते हैं कि आरजीपीवी ग्रेडिंग सिस्टम कैसे काम करता है तो आपको अपने ग्रेड का मतलब और ऐकडेमिक रूप से आपका परफॉरमेंस कितना अच्छा है इसकी समझ मिलती है। यह जानना ज़रूरी है कि एक अच्छा CGPA बनाए रखने के लिए इंटरनल असेसमेंट, प्रैक्टिकल एग्जाम और थ्योरी एग्जाम में अच्छा परफॉर्म करना बेहद ज़रूरी है।
ये भी देखें :
OU ग्रेडिंग सिस्टम
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FAQs
आरजीपीवी में कोर्स में फेल होने से आपका सीजीपीए कम हो सकता है, लेकिन इस झटके की गंभीरता, फेल हुए कोर्स से जुड़े क्रेडिट और अन्य कक्षाओं में आपके प्रदर्शन, दोनों पर निर्भर करती है। आपके सीजीपीए की गणना ग्रेड पॉइंट्स को क्रेडिट वैल्यू से तौलकर की जाती है। इसलिए, अगर आप ज़्यादा क्रेडिट वैल्यू वाली कोर्स में फेल हो जाते हैं, तो यह आपके सीजीपीए को कम क्रेडिट वाली कोर्स में फेल होने से ज़्यादा कम कर देगा।
विभिन्न विषयों और कार्यक्रमों में, आंतरिक मूल्यांकन का महत्व बदलता रहता है। आमतौर पर, यह उस विषय के कुल अंकों का 20% से 50% के बीच होता है। इसी प्रकार, प्रायोगिक परीक्षाओं का महत्व विषय और टाइम टेबल के नियमों के आधार पर भिन्न हो सकता है, जो आमतौर पर कुल अंकों का 20% से 50% के बीच होता है।
आरजीपीवी या इसके किसी भी संबद्ध संस्थान से डिग्री प्राप्त करने के लिए, आपको न्यूनतम 5.0 सीजीपीए बनाए रखना होगा। यह नियम स्नातक और स्नातकोत्तर दोनों कार्यक्रमों पर लागू होता है।
आरजीपीवी में आपका सीजीपीए आपके ग्रेड और प्रत्येक विषय के क्रेडिट, दोनों को ध्यान में रखकर निर्धारित किया जाता है। प्रत्येक विषय को आपके अंकों के आधार पर एक क्रेडिट मान, जैसे 4, और एक ग्रेड पॉइंट दिया जाता है। अपना सीजीपीए निकालने के लिए, आप प्रत्येक विषय के इन मानों को गुणा करें, सभी विषयों के भारित ग्रेड पॉइंट जोड़ें, और फिर कुल क्रेडिट से भाग दें।
यदि आप सेमेस्टर एग्जाम देने वाले नियमित छात्र हैं, तो आपको अपने कोर्स पाठ्यक्रम के प्रत्येक विषय के कम से कम 75% व्याख्यानों और प्रायोगिक कक्षाओं में उपस्थित होना आवश्यक है। हालाँकि, यदि कोई उचित कारण हो, तो विभागाध्यक्ष अधिकतम 10% और कुलपति अतिरिक्त 5% की कमी को माफ कर सकते हैं।















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